स्वीडन के इस स्कूल में लड़का लड़की एक समान के लिए है ख़ास नियम

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दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में से एक है स्वीडन। यहाँ की सरकार और समाज निरंतर बेहतर जिंदगी के प्रयास और बदलाव करती रहती है। ऐसा ही एक प्रयास स्वीडन के एक प्राइवेट स्कूल ने किया है। इस स्कूल ने छोटे बच्चों के बीच लैंगिक भेदभाव मिटाने और लड़का लड़की एक समान के नारे को मजबूत करने के लिए स्कूल में कुछ नियम कायदे बनाये है।

इन नियमों के अनुसार स्कूल परिसर में किसी बच्चे के लिए “लड़का”, “लड़की” या ऐसा ही कोई लैंगिक शब्द इस्तेमाल करने पर पूर्ण प्रतिबन्ध है। इस तरह के नियम बच्चों में समान भावना पनपने के लिए बनाये गए है। स्कूल में एजुकेशनल प्रोग्राम भी सभी नियमों को ध्यान में रख कर बनाये गए है।

इंग्लिश के शब्दों “ही”, “शी”, “हिज” और “हर” पर रोक

स्कूल प्रबंधन ने ऐसे कायदे बनाये है जिनसे बच्चे लड़का और लड़की में भेदभाव के बारे में बिलकुल न समझ सके। स्कूल में पढ़ाने वाले सभी टीचर्स और काम करने वाले स्टाफ को निर्देश है की वे सभी बच्चों को उनके नाम से पुकारे। ऐसा करने से प्राइवेट स्कूल में “ही” और “शी” जैसे अलग अलग लैंगिक भेदभाव वाले शब्दों का इस्तेमाल नहीं होगा जिससे की सभी लड़का लड़की एक दूसरे को समान नजरिये से देखेंगे।

स्कूल की एक टीचर ने बताया ” संसार में आने के साथ ही बच्चों से तरह – तरह की उम्मीदें जुड़ने लग जाती है। ये अलग – अलग आशाएं इस पर निर्भर करती है की हम लड़के है या एक लड़की। हमारी स्कूल में वातावरण इसके बिलकुल विपरीत है। यहाँ कोई भी बच्चा किसी और से भिन्न नहीं है। सभी बच्चों को बराबरी का माहौल मिलता है। ”

स्वीडन ने मजबूत किया लड़का लड़की एक समान का नारा

हालिया एक अंतर्राष्ट्रीय नामी मैगज़ीन ने लैंगिक समानता पर नई रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर के देशों में स्वीडन लैंगिक समानता बनाए रखने वाला दुनिया का चौथा सबसे बेहतर देश है। यह रिसर्च ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स के नाम से पब्लिश की गयी है। इसके अनुसार स्वीडन ने लैंगिक भेदभाव दूर करने में 80 प्रतिशत तक सफलता प्राप्त की है। ऐसे प्रयासों से स्वीडन लड़का लड़की एक समान की पहल में एक आदर्श बन कर उभर रहा है।

इस स्कूल से अन्य भी ले रहे प्रेरणा

स्वीडन का यह स्कूल न सिर्फ आसपास के इलाके में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में एक उदाहरण बन कर उभर रहा है। स्कूल के शैक्षिक प्रोग्राम को भी इस तरह से बनाया गया है की बच्चे आपस में भेदभाव किये बिना साथ खेल और पढ़ सके। इस स्कूल में लड़को के लिए अलग मैदान या लड़कियों के लिए अलग गुड़िया कक्ष नहीं है। यहाँ सभी बच्चे एक साथ एक ही खेल मैदान में खेलते है। स्कूल की डायरेक्टर का कहना है की बच्चों का छोटी उम्र से ही दुनिया को बाँट कर देखना ठीक नहीं है। हम उनको बराबरी की समझ देना चाहते है।

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