सीएम को काला झंडा दिखाने वाले दलित छात्र प्रभात की कहानी पढ़कर भर आएंगी आपकी आंखें

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देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की राजधानी में सीएम को काला झंडा दिखाने वाले युवाओं ने देश भर में सुर्खियां बटोरी थीं। इनमें से अधिकांश लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्यार्थी थे। इन्हीं में से एक नाम है अशोक कुमार प्रभात (Ashok Kumar Prabhat)। साथियों के बीच प्रभात (Prabhat) नाम से लोकप्रिय इस युवा की कहानी पढ़कर न सिर्फ आपकी आंखें भर आएंगी, बल्कि सिस्टम की बेहूदगी को लेकर आपको गुस्सा भी आएगा।

कौन है प्रभात (Prabhat)

24 साल का युवा प्रभात मूलरूप से बस्ती के कलवारी गांव का रहने वाला है। दलित समाज से आने वाले प्रभात लविवि (Lucknow University) में बीए अंतिम वर्ष का छात्र है और समाजवादी छात्र सभा का सदस्य भी। परिवार में मां पापा के अलावा एक छोटी बहन भी है। प्रभात की पारिवारिक दशा अत्यंत दयनीय है। पिता मजदूरी करके घर का खर्च चलाते थे। मगर इस बीच बीमारी ने उन्हें बिस्तर पर ला दिया। पैसे की व्यवस्था नहीं होने से उनका इलाज नहीं हो सका। आज स्थिति यह है कि उनका एक पैर पूरी तरह से खराब हो चुका है।

छोटी बहन है दिव्यांग

प्रभात अपने परिवार के बारे में बताते हुए भावुक हो जाता है। डबडबाई आंखों से प्रभात बताता है कि छोटी बहन भी दिव्यांग है। उसकी उम्र 17 साल है। पिता के बिस्तर पकड़ लेने के बाद मां खेतों में मजदूरी करके परिवार का पेट पालती हैं। पिता की बीमारी से उनके ऊपर काफी कर्ज हो चुका है। अब अपनों ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया है।

सिस्टम का सताया प्रभात (Prabhat)

भात ने बताया कि उसका बीए 2016 में ही पूरा हो जाता। मगर पिता की तबियत खराब हो गई और उसकी फीस समय पर नहीं भरी जा सकी। लविवि में पूअर बॉयज फंड से उसकी फीस भरने की वह अधिकारियों से गुहार लगाता ही रह गया, मगर किसी ने भी उस पर दया नहीं दिखाई। इस कारण उसका प्रवेश नहीं हो सका। इस बीच उसने मजदूरी भी की मगर पूरा पैसा पिता के इलाज में खर्च हो गया।

जानिए क्यों हुआ था सीएम (Yogi Adityanath) का विरोध

सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को काला झंडा दिखाने के बाद सभी विद्यार्थियों को जेल भेज दिया गया। मगर इस बीच असल मुद्दा दब गया। आखिर इन स्टूडेंट्स ने सीएम का विरोध क्यों किया इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हुईं। लोगों को लगा कि ये सारे छात्र-छात्राएं समाजवादी छात्रसभा के पदाधिकारी हैं, इसलिए विचारधारा को लेकर यह विरोध हुआ। मगर सच्चाई यह नहीं है। इसकी मूल वजह ही कुछ और थी।

सीएम को काला झंडा दिखाने के बाद सभी स्टूडेंट्स को दबोच लिया गया

लखनऊ विश्वविद्यालय में पूअर बॉयज फंड नाम से योजना बनाई गई है। स्टूडेंट्स की फीस का कुछ हिस्सा इस फंड में जमा किया जाता है। इसके तहत गरीब विद्यार्थियों की मदद की जाती है। मगर विवि में सालों से इस फंड का उपयोग नहीं किया गया था। जबकि विवि में हजारों जरूरतमंद विद्यार्थी इसका लाभ लेने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते हैं। इस फंड का लाभ प्रभात  को मिलना ही चाहिए था। मगर सड़ चुके इस सिस्टम से ज्यादा उम्मीद करना बेमानी ही होगी। हुआ भी वही और प्रभात का एक साल खराब हो गया। इसी बीच विश्वविद्यालय में हिंदवी स्वराज नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया। इसी कार्यक्रम को लेकर इन छात्रों ने विरोध करना शुरू कर दिया। क्योंकि उनका आरोप था कि कार्यक्रम में खर्च होने वाले 25 लाख रूपए पूअर बॉयज फंड और स्टूडेंट्स एकेडमिक के पैसे खर्च किए जा रहे हैं।

सीएम व राज्यपाल दोनों से की थी शिकायत

काला झंडा दिखाने वालों के समूह में शामिल राकेश समाजवादी, अपूर्वा वर्मा (Apoorva Verma), पूजा शुक्ला (Pooja Shukla) और अनिल यादव मास्टर (Anil Yadav) बताते हैं कि विवि की इस मनमानी की शिकायत उन लोगों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय में दर्ज कराई थी। मगर उनकी शिकायतों को दरकिनार कर दिया गया। इस कारण हमारे सामने सीएम का विरोध करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। प्रभात ने बताया कि उसके साथ राकेश समाजवादी, अपूर्वा वर्मा, पूजा शुक्ला और अनिल यादव मास्टर के साथ अंकित सिंह बाबू (Ankit Singh Babu), महेंद्र यादव (Mahendra Yadav), माधुर्य सिंह मधुर (Madhurya Singh Madhur), सतवंत सिंह, नितिन राज, विनीत कुशवाहा को भी जेल में ठूंसा गया था।

अब खुद के इलाज के लिए मांग रहा मदद

अगर आप सीएम को काला झंडा दिखाने वाला विडियो ध्यान से देखेंगे तो उसमें एक युवक अचानक से आता है और सीएम की गाड़ी की बोनट पर कूद जाता है। जिसकी वजह से पूरी फ्लीट रूक जाती है। सुरक्षा गार्ड तुरंत उसको किनारे ले जाकर पीटने लगते हैं। यह सब इतना अचानक होता है कि उस शख्स को विडियो में कोई पहचान भी नहीं पाता है। उसके बाद सब इतिहास हो जाता है। गाड़ी के बोनट पर कूदने वाला युवा प्रभात ही है। प्रभात ने बताया कि सुरक्षा कर्मियों ने मौके पर ही उसके उपर लात घूसे बरसा दिए। उसके बाद जेल में भी उनको पीटा गया। जिसकी वजह से उसके सीने में चोटें आ गईं। जो घटना के छह माह बाद भी दर्द करती हैं। प्रभात ने बताया कि उसके पास इलाज कराने भर के पैसे नहीं है। लोगों से मदद की गुहार लगाई है।

मुलायम सिंह ने दिया था मदद का आश्वासन

प्रभात (Prabhat) ने बताया कि जेल में मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) उसके साथियों से मुलाकात करने आए थे। जहां पर उसने अपनी सारी व्यथा बताई थी। जिसके बाद उन्होंने मदद करने का आश्वासन दिया था। साथ ही जेल से बाहर आने के बाद मुलाकात करने के लिए भी बुलाया था।

मुलायम (Mulayam Singh Yadav) व अखिलेश (Akhilesh Yadav) हैं आदर्श

प्रभात (Prabhat) ने बताया कि उसके आदर्श मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव हैं। प्रभात कहता है कि उसने मुलायम सिंह के संघर्षों को पढ़ा है। किन परिस्थितियों में उन्होंने यह मुकाम हासिल किया, यही उसके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। प्रभात, अखिलेश यादव के कार्य करने की क्षमता और उनकी दूरदर्शिता का कायल है। वह पिता पुत्र की इस जोड़ी को अपना हीरो मानता है।

सिस्टम की मार ने मजबूत बनाया

प्रभात (Prabhat) ने बताया कि इतनी कम उम्र में ही वह सिस्टम की दुश्वारियों का मारा है। गांव में भी कभी सरकारी मदद नहीं मिली। जब लविवि में आया तो यहां पर भी इस सिस्टम ने मुझे तोड़ने का प्रयास किया। मगर इनसे अब लड़ने और जूझने की आदत हो चुकी है। वह हर मजलूम की लड़ाई लड़ने के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है।

Source: http://projexisnews.com

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